मरकस बाबा को याद करते हुए यक्कम - दुइय्यम ,,,,,,,,,,,

कुछ औरों की , कुछ अपनी ... मरकस बाबा ! .. चौकिये नहीं  ( उनके लिए जो संशोधनवाद को गरियाते हुए नाक-भौं सिकोड़े रहते हैं और मार्क्सवाद को छुई-मुई समझकर संशोधनवादियों से बचाने में ही अपने को सबसे बड़ा मार्क्सवादी समझे रहते हैं ) ! .. यह मार्क्स को 'मरकस' मैंने नहीं किया ! .. भला... [पूरी पोस्ट]
writer अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी
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[05 May 2010 11:39 AM]

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