... और जीत गए जंग

अपना पंचू हम सदा एक ही रोना रोते रहते हैं कि इस समय मैं कौन किसके लिए क्या करता है? सब अपने-अपने लिए जीते हैं। हकीकत में यह पूर्ण सत्य नहीं है आज भी दुनिया में कई लोग मौजूद हैं जो निस्वार्थ भाव से सेवा कार्य करते हैं। असल में उसमें उन्हें जो मजा आता है सुख मिलता... [पूरी पोस्ट]
writer lokendra singh rajput

यादें

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[05 May 2010 10:16 AM]

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