तन पर लपेटे फटे व पुराने कपड़े---------------------(मिथिलेश दुबे)
तन पर लपेटे फटे व पुराने कपड़ेवह सांवली सी लड़की,कर रही थी कोशिश शायद ढक पाये तन को अपने,हर बार ही होती शिकार वहअसफलता और हीनता कासमजा की क्रूर व निर्दयी निगाहेंघूर रहीं थी उसके खुलें तन को,हाथ में लिए खुरपे सेचिलचिलाती धूप के तलेतोड़ रही थी वह पेड़ो से...
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Mithilesh dubey
कविता लड़की दुबे
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[05 May 2010 10:01 AM]



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