तन पर लपेटे फटे व पुराने कपड़े---------------------(मिथिलेश दुबे)

Dubey तन पर लपेटे फटे व पुराने कपड़ेवह सांवली सी लड़की,कर रही थी कोशिश शायद ढक पाये तन को अपने,हर बार ही होती शिकार वहअसफलता और हीनता कासमजा की क्रूर व निर्दयी निगाहेंघूर रहीं थी उसके खुलें तन को,हाथ में लिए खुरपे सेचिलचिलाती धूप के तलेतोड़ रही थी वह पेड़ो से... [पूरी पोस्ट]
writer Mithilesh dubey

कविता लड़की दुबे

views
69
upvote
7
downvote
1
rating
6
comments
25
[05 May 2010 10:01 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix