ए भारत के लोकतंत्र

महामूर्खराज की कलम से हाँ ए भारत के लोकतंत्र चल पड़ा है तू किस राह पर जनता के सेवक ये सफेदपोश अब जनता से सलाम ठुकवाते है, काली कमाई का जश्न मनता उनके यहाँ रोज जिनमे बहती सोमरस की नदियाँ हैं और शबाब से मानती रंगरलियाँ हैं, कबाबों के स्वाद मे उलझती उनकी जिह्वा जनहित जनविकास का... [पूरी पोस्ट]
writer महामूर्खराज
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[05 May 2010 09:47 AM]

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