ये महिलाएं हैं या कीड़े-मकोड़े

Alag sa अब तो लगता है कि उल्टे-सीधे विज्ञापनों में बेतुके, अतिश्योक्तिपरक व अभद्रता लांघने वाले विषयों की आदत पड़ गयी है सबको। क्योंकि कहीं से भी विरोध का स्वर उठता या सुनाई नहीं देता। इसी से शह पा कर विज्ञापन देने और बनाने वालों में होड़ सी लग गयी है अश्लीलता... [पूरी पोस्ट]
writer Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[05 May 2010 09:10 AM]

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