समर्पण !
समर्पण .... कैसा? किसको?समर्पण का आधार कभी भी शरीर नहीं होताशरीर ! तो कोई भी पा लेता है आत्मा !- अमर हैसमर्पण का स्रोत है गंगा वहाँ से निकलती है ...गंगा में नहाना और गंगा को समझना - दो अलग बातें हैं ...गंगा में नहाकर ना तुम पवित्र होते होना गंगा मैली...
[पूरी पोस्ट]
रश्मि प्रभा...
सर्वाधिकार सुरक्षित
35
5
0
5
25
[05 May 2010 08:18 AM]



Shuffle








