" अगर सच बोलता हूं … सर मेरे इल्ज़ाम आता है ", " पता है ; क्यों बुझाना चाहता तूफ़ां चराग़ों को " , " शकल सूं नीं
आज प्रस्तुत है तीन ग़ज़लें ! लेकिन पहले एक बात …* कृपया , सहयोग बनाए रखें ! *प्रिय मित्रों ! शस्वरं का अंतर्जाल पर शुभारंभ हुए अभी एक महीना 9 मई 2010 को होगा । पहले ग्यारह - बारह दिन में ही मेरी ब्लॉग मित्र मंडली में तीस से भी अधिक आत्मीयजन सम्मिलित...
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Rajendra Swarnkar
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[05 May 2010 07:57 AM]



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