ना जी ना ........विलुप्त नहीं हुई बस बदल गई हैं पंरंपराएं !!
पैर छू कर प्रणाम करना एक अदब एक इज्जत होती थी। जिसे संस्कार के रूप में भी आंका जाता था पर अब ये नमस्ते, हाय हेलो तक सीमित होकर रह गई है। कार्तिक के दादाजी घर आए तो वह दादू-दादू कहकर चिपक गया। तो दादू ने भी उसे प्यार से ढेर सारा दे डाला। लेकिन फिर पापा ने...
[पूरी पोस्ट]
शिवम् मिश्रा
15
2
0
2
9
[05 May 2010 06:33 AM]



Shuffle








