उनके माथे पर अक्सर पत्थर के दाग रहे

bhardwaj'sblog उनके माथे पर अक्सर पत्थर के दाग रहे जो  इमली  अमरूदों   आमों   वाले बाग़ रहे उन कदमों को पर्वत या सागर क्या रोकेंगे जिनकी आँखों में पानी सीने में आग रहे अँधियारे आँगन में रहतीं सपनों की किरणें जैसे  ... [पूरी पोस्ट]
writer chandrabhan bhardwaj
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[05 May 2010 02:46 AM]

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