बेटी माँ बाप की साँसों का सतत स्पन्दन है

साहित्य-सहवास बेटियां आँगन की महक होती हैंबेटियां चौंतरे की चहक होती हैंबेटियां सलीका होती हैंबेटियां शऊर होती हैंबेटियों की नज़र उतारनी चाहिएक्योंकि बेटियां नज़र का नूर होती हैंइसीलिएबेटी जब दूर होती हैं बाप सेतो मन भर जाता संताप सेडोली जब उठती है बेटी कीतो पत्थरदिलों... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[05 May 2010 01:29 AM]

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