वरुण के बच जाने से उपजी खुशी

एकोऽहम् रीमा और वरुण मुझे चमत्कृत किए जा रहे हैं। मेरी कुछ धारणाओं को झुठलाए जा रहे हैं। कोई तीन-साढ़े तीन वर्षों से दोनों को ध्यान से देख रहा हूँ। प्रतिदिन उनके साथ कुछ समय गुजारना पड़ रहा है। कभी आधा घण्टा तो कभी एक घण्टा तो कभी इससे भी अधिक। जब भी उनके पास से... [पूरी पोस्ट]
writer विष्णु बैरागी

जीवन का इन्‍द्रधनुष

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[04 May 2010 20:30 PM]

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