ख़ुशी के दो पल ..............................
उम्र के इस मोड़ पर मै जीना चाहती हूँ , कुछ पल अपनी जिंदगी के संवारना हूँ ,वक्त को यादो में संजोना चाहती हूँ ,और यादो के मोती एक माला में पीरोना चाहती हूँ ,अब तक का सफर मैंने ऐसे किया ,मै किसी में , और कोई मुझमे जीया ,शेष बचे अपनो को नही खोना चाहती...
[पूरी पोस्ट]
Archana
कविता
17
2
0
2
11
[04 May 2010 19:58 PM]



Shuffle








