वक़्त गुज़र ही जाता हैं
क्या लिखूं ? सुनते आये हैं कि सच को जीना जितना मुश्किल है उस से भी मुश्किल उसको ईमानदारी से बयां करना ..... लेकिन सच बोलने से हमें गुरेज़ नहीं ....हरिश्चंद्र टाइप इंसान तो नहीं लेकिन हाँ! यूँ ही रोज़मर्रा की छोटी - छोटी बातों पर दिन में पंद्रह बार बेवजह...
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Priya
जीवन
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[04 May 2010 15:37 PM]



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