जन्म-मरण अविरत फेरा, जीवन बंजारों का डेरा
क्या खोया, क्या पाया जग मेंमिलते और बिछुड़ते मग मेंमुझे किसी से नहीं शिकायतयद्यपि छला गया पग-पग मेंएक दृष्टि बीती पर डालें, यादों की पोटली टटोलें!जन्म-मरण अविरत फेराजीवन बंजारों का डेराआज यहाँ, कल कहाँ कूच हैकौन जानता किधर सवेराअंधियारा आकाश...
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Arvind Mishra
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[04 May 2010 15:42 PM]



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