निरुपमा के बहाने अब एक बार अपने भीतर झांकें, प्लीज़!
स्त्री का कोई धर्म नहीं होता और धर्म ने उसके लिए सिर्फ बेड़ियां बनाईं हैं, और धर्म के ठेकेदार और पितृसत्ता के चौकीदार हाथ मे हाथ मिलाए सत्ता की सीढियाँ चढते हैं और मिल बाँट कर 'धर्म विमुख औरतों' को सबक सिखाते हैं, और....सब मंजूर, सब सही। पर हम कब तक...
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आर. अनुराधा
खबर विश्लेषण
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[04 May 2010 14:44 PM]



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