उफ् बुढ़ापा हाय जवानी.........
तुम्हें नजर नहीं आता, इस सीट के ऊपर क्या लिखा है!!-इस तीखी आवाज को सुनकर मेट्रो ट्रेन में अचानक सन्नाटा छा गया। सभी का ध्यान उस बूढे की तरफ गया जो उस गरीब-से नौजवान को दहकती ऑंखों से घूर रहा था। उसके बगल में एक बूढ़ा सरदार बैठा था-हुण् माफ कर दो,...
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जितेन्द़ भगत
ये दुनिया ऊटपटांगा
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[04 May 2010 12:44 PM]



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