जाति और धर्म के नाम पर बेटियों की बलि

नारी एक मां ने अपनी बेटी की हत्या कर दी। सुनकर मन एक बारगी तो सुन्न पड़ गया। ऐसा कैसे हो सकता है एक उम्र के बाद मां बेटी का रिश्ता दो सहेलियों का सा हो जाता है, जो अपने सुख-दुख एक दूसरे के साथ शेयर करती है। माँ सिर्फ मां न रहकर बेटी की पथ-प्रदर्शक बन जाती है।... [पूरी पोस्ट]
writer pratibha
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[04 May 2010 12:26 PM]

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