देवाला की माला....
(2)अँधेरी तरंगो के नीले नभ में भंवर की सिमटती गहराई में सुलगती आग की लपट मेंअटखेलियाँ करती बाला.... विधवा की जवानी गद्दार की देश भक्ति राजनीति के गंदे रंग और आतंकवाद की शक्ति से खिन्न होकर आती बाला डालने देवाला के माला.... महबूब...
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Tej Pratap Singh
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[04 May 2010 11:52 AM]



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