रेलवे स्टेशन पर अध्यात्म
मैंने बचपन में एक कहानी पढ़ी थी, शीर्षक था "देशभक्त "। इस कहानी में एक देशभक्त जीवन के आखरी पलों रंगमच के एक दृश्य के तरह प्रस्तुत किया गया था जिसे ऊपर से भगवान् देख रहे है । अंत बड़ा ही अद्भुद था , इस कहानी में मृत्यु को उत्सव कि तरह मनाया जा रहा था ।...
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Gourav Agrawal
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[05 Apr 2010 07:53 AM]



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