निरूपमा , प्रियभांशु ....औनर किलिंग ....लिव इन रिलेशनशिप ...और कुछ बातें यूं ही
चित्र प्रभात झा जी के ब्लोग गप शप का कोना से साभार ऐसा लगता है कि नियति को अब यही मंजूर है कि एक के बाद एक ऐसी कोई न कोई घटना होती रहे जो आम जन को उद्वेलित और आंदोलित करती रहे ।कहां तो कसाब के फ़ैसले पर पूरे देश की निगाहें टंगी हुई थीं और कहां निरूपमा की...
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अजय कुमार झा
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[04 May 2010 11:08 AM]



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