एक दफा फिर
लीजिये फिर से आ गया मे अपने नए नए बने शौक को ले के.. हाँ जी पेश-ए-खिदमत है एक और ग़जल... एक दफा फिर..एक दफा फिर हमे अपनों ने लूटा है,एक दफा फिर आज ये दिल टूटा है.दिल पे बहुत किया यकीं अब तक,अब पता चला की ये दिल झूठा है.कल तलक सोचा था उन को अपना,आज फिर...
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हिमांशु पन्त
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[04 May 2010 10:13 AM]



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