सम्वेदनाओं के शून्य...!!!
सम्वेदनाओं के शून्य को ,जगाना चाहता हूँ ! विचारो के उत्तेज से ,हलचल मचाना चाहता हूँ !मर्म को पहचान, चोट करारी होनी चाहिए , बंद आँखों को नींद से ,जगाना चाहता हूँ !खून की गर्म धारा ,बह रही ही जिस्म में , देश-भक्ति का इसमें ,उबाल लाना चाहता हूँ !जज्बों में...
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कमलेश वर्मा
देश भक्ति
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[04 May 2010 09:05 AM]



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