इनसे लड़ना होगा नहीं तो.....!!
झरखंड में जन्मी और दिल्ली में पत्रकारिता करने वाली निरुपमा आज इतिहास बन चुकी है. निरुपमा को किसी खाप पंचायत के सरपंच ने नहीं मारा. उसका गला घोटने वाले उसके अपने थे. शायद, उसके मां-बाप. वैसे हमारे देश के लिए यह कोई नई और अचरज में डालने वाली घटना नहीं है....
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विकास
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[04 May 2010 07:46 AM]



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