बसंत 'नाचीज' के छत्तीसगढी गजल

गुरतुर गोठ बिना, गत बानी के घर, नाना नानी केडोकरी, डोकराबिन, दवई पानी केआय डोली, काकरढेला रानी केलगत कइसन होहोरा छानी केऊंचा है दामकाहे कानी केबतावथस अइसनदेबे लानी केदिखथे करेजा कसतरबुज चानी केबके आंय बांयबेइमानी करकेकर दान, पुन ऊनानि कभू दानी केमरगे खा... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

बसंत 'नाचीज'

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[04 May 2010 07:13 AM]

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