मुकम्मिल इनसानियत की धार थी
यादें हैनसन टी के स्मृतियों का कोठार है मेरा हृदयमैंने कुछ वैसे ही सहेज रखी हैप्रियजनों की यादेंजैसे कोई अमीर लाला तिजोरी मेंबंद किये रखता है सोना-चांदीपसलियों के पिंजरे में कैद मेरी प्रिय यादों को न तेज हवाएं...
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ajay prakash
poetry
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[04 May 2010 06:18 AM]



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