कहानी - प्रेम की उप-कथा

कही  अनकही हिंदी की जानी मानी साहित्यिक पत्रिका कथादेश के मई अंक में मेरी कहानी आई है, आपसे बांट रहा हूं - जब दोस्ती प्रेम मे धीरे-धीरे तब्दील हो जाती है तो दोस्ती के अधिकार और आदते-प्रक्रियाएँ खत्म थोड़े ना होते है वहाँ तो एक समानता का रिश्ता होता है..... थोड़ा... [पूरी पोस्ट]
writer DUSHYANT
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[04 May 2010 05:55 AM]

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