निंदारस का नया वर्जन

शब्द-योग दूसरों की बुराई अर्थात निंदा करने की कला पतनातीत है। गारंटीड। न पहले जैसे परम कमीने रहे, न चरम किस्म की बुराई करने वाले। ले-देकर सब औसत लोग ही बचे हैं। हर क्षेत्र की तरह। खोखले। मुंह झुठल्ले। निंदा तक पेट से नहीं कर पाते। ऊपर से निंदा की ‘नैतिकता’ का... [पूरी पोस्ट]
writer अनुज

vyangya

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[04 May 2010 04:42 AM]

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