समाजवाद की लड़ाई मानवता की लड़ाई है।
पुस्तक लोकार्पण और परिचर्चा की रिपोर्टपुस्तक लोकार्पण का दृश्य समाजवाद मानव की मुक्ति का महाआख्यान है। पूंजीवाद की आलोचना का आधार सिर्फ़ उसकी आर्थिक प्रणाली नहीं बल्कि उसके सामाजिक-सांस्कृतिक आयाम भी हैं। इसने समाज को अमानवीय बना दिया है। औरतों, दलितों...
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अशोक कुमार पाण्डेय
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[04 May 2010 02:49 AM]



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