राही

हिंदी हैं हम.. बैठे हुए अचानक,मन में कुछ आया ...उस एक सपने ने,मुझको कवि बनाया...होठों पर एक रेखा ,जब स्मित की आई,मन में आशा की,कली फूल बन पाई...पलकों के अंदर बंद,सपनों ने ली अंगडाई,अपने छोटे लक्ष्यों की,हमने एक सूची बने...आँखों में छुपे उजाले,चमक नई वो लाये,सारी दुनिया... [पूरी पोस्ट]
writer आस्था "देव"
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[04 May 2010 02:22 AM]

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