यात्रा के दौरान
इस बारपूरे सफर के दौरानमैने एक भी कविता नहीं लिखीएक मासूम ज़िद्दी बच्चे नेछीन ली मुझसेमेरी खिड़की वाली सीटऔर फिर मैंपूरे रास्ते देखता रहाउसकी आँखों मेंनदी, पुल, पहाड़औरभागते हुए पेड़ों के प्रतिबिंब....
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मणिमोहन
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[04 May 2010 01:52 AM]



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