varsha

varsha उकताई हुई औरतेंवो आटा गूंदती हैंखाना बनाती हैंबर्तन मांजती हैंझाड़ू लगाती हैंपोछा मारती हैंताउम्रगोदाम भर-भर जायेपूरी उम्र उनके गुंदे आटे सेसैंकड़ों एकड़ खेत में उगे गेहूं कीवो रोटियां पका चुकी हैंटनों बर्तन मांज चुकी हैं अबतकमीलों झाड़ू बुहार चुकींउकताई... [पूरी पोस्ट]
writer वर्षा
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[04 May 2010 00:02 AM]

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