मुक्तिका: शहर की आवाज़ --संजीव 'सलिल'
मुक्तिका:शहर की आवाज़ संजीव 'सलिल' *आइये! मिलकर सुनें, हर शहर की आवाज़.जो सुनें उसको गुनें, बन शहर की आवाज़..क्या घटा?, क्या घट रहा है?, कल घटेगा क्या?सिर न धुनें, जान लें, सुन शहर की आवाज़..शुभ-अशुभ अच्छा-बुरा, जो चाह वह चुन लें.लगे अपना देश सुन्दर, शहर...
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दिव्य नर्मदा divya narmada
samyik hindi kavita
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[04 May 2010 00:13 AM]



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