"सुमन हमें सिखलाते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)

नन्हें सुमन “शिक्षाप्रद बाल-कविता”काँटों में पलना जिनकी,किस्मत का लेखा है।फिर भी उनको खिलते, मुस्काते हमने देखा है।।कड़ी घूप हो सरदी या, बारिस से मौसम गीला हो।पर गुलाब हँसता ही रहता,चाहे काला, पीला हो।। ये उपवन में हँसकर,भँवरों के मन को बहलाते हैं।दुख में कभी न... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

बालकविता

views
13
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
7
[03 May 2010 22:01 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix