मुन्ना :मेरा दोस्त - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

नन्हा मन जब से जंगल कटने शुरू हुए , हमारी तो मुसीबत ही हो गई । जंगल में शिकार नहीं मिलता तो बाघ और भेड़िए गाँव में घुस आते हैं। जो मिला ,उसे ही मारकर खा जाते हैं । चाहे बछड़ा मिले चाहे भेड़-बकरी , चाहे कुत्ता बिल्ली। हमारे गाँव में पिछले कई दिनों से कई वारदात हो... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा सचदेव

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

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[03 May 2010 21:30 PM]

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