अच्छा नहीं

kavyakala अच्छा नहीं दोस्तो मेरे मरने के पहले मर जाना जब तक स्वास चल रही प्यारे जीने का तुम लुत्फ़ उठाना जब तक मदिरा है प्याली में पीते जाना, पीते जाना अमृत मिल रहा है जीवन में उसको प्यारे क्यों ठुकराना गरल मिल रहा है तो भी क्या शिव की तरह पान कर जाना भला बुरा जो... [पूरी पोस्ट]
writer Laxmi N. Gupta
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[03 May 2010 20:20 PM]

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