सच्ची-मुच्ची
नई-नई आई वह रोगिणी मेरे परामर्श कक्ष से जाने लगी, तो उसने मुड़कर मुझे अजीब सी नजरों से देखा।‘क्या हुआ..?’ मैंने पूछा।‘कह नहीं सकती!’ वह बोली- ‘मैं निर्धारित समय से पांच मिनट पहले चली आई थी पर आपने मुझे तुरंत भीतर बुला लिया और ढेर-सा वक्त भी दिया। आपने...
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Bhanu choudhary
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[11 Apr 2010 03:12 AM]



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