यह कोई कविता नहीं है - 1 (आज भी )
आज भी,खबरें बनती हैंकुछ 'निरुपमा', 'आरुषी', 'सायमा'और पता नहीं कितनी गुमनाम जो नहीं बन पातीं 'खबर'आज भी,कहीं मार दिया जाता है याआत्महत्या कर लेता हैकोई नौजवान, कभीप्यार नाम की गलती करने परआज भी,पढा - लिखा अधकचरा वर्गसाधे हुए है, अपने दोगलेपन कोमहानता...
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अर्कजेश
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[03 May 2010 16:24 PM]



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