मैं वकील, एक आधुनिक उजरती मजदूर, अर्थात सर्वहारा ही हूँ।
पिछले आलेख में मैं ने एक कोशिश की थी कि मैं आम मजदूर और सर्वहारा में जो तात्विक भेद है उसे सब के सामने रख सकूँ। एक बार मैं फिर दोहरा रहा हूँ कि सर्वहारा का तात्पर्य उस 'आधुनिक उजरती मजदूर से है जिस के पास उत्पादन के अपने साधन नहीं होते और जो जीवन यापन के...
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दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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[03 May 2010 16:00 PM]



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