बाला......
वैसे हाला और मधुशाला पर बहुत कुछ लिखा गाया है पर मेरी कोशिश आज यहाँ मधुशाला को दूसरे रूप में जिन्दा करना है.बाला जो की यहाँ मन के रूप में होगी, मधुशाला देवाला और हाला माला के रूप में.(1)सुख संचित कर हंसती बाला,जीवन के रंग को जीती बालादुःख में पाँव पसार...
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Tej Pratap Singh
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[03 May 2010 13:22 PM]



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