हर रंग में छांट लूं ...
चलो एहसासों को दुपट्टे में बाँध लूं तुम्हारी छुअन को किनारी सा टांक लूं लिपटे जो मुझसे तो तुम नज़र आओ काँधे से फिसलो तोबाँहों में उतर जाओ दांतों तले दबा लूं तो हया से लगो ऐसे बनो मेरा हिस्सा कभी न जुदा से लगो इतने रंग भर दो के अम्बर को बाँट दूं दुपट्टे की...
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Sonal Rastogi
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[03 May 2010 13:02 PM]



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