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प्रिय काव्य प्रेमियो,कोलकाता : शायद अगस्त, 2002 का महीना था । हम कुछ कविता प्रेमी प्रभात पाण्डेय जी के साथ बैठे चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे । कई दिनों से मन में एक चाह थी कि कोई एक ऐसी पत्रिका हो जो केवल कविता पर केन्द्रित हो । चाहते तो और बहुत से मित्र...
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RAJESHWAR VASHISTHA
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[03 May 2010 13:01 PM]



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