अधूरी ...!!!

के.सी.वर्मा प्यार की अभिव्क्ति साधन मौन मन से इच्छाओं की तरंग पल-पल चलती जाती गन्तव्य की ओर दम तोड़ जाती वहीं नही मिलता सामजस्य उस अनुभूति का जो थी इधर इस किनारे पर तरंग के रूप में कठिन था मुड़ना भंवर में साँस टूटी गुजरती रही अनजानी अनदेखी लहरें हस्र यही होना था... [पूरी पोस्ट]
writer कमलेश वर्मा
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[03 May 2010 12:17 PM]

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