दिल क्यों है परेशां?
बेनाम से इक ख़ौफ से दिल क्यों है परेशा
जब तय है कि कुछ वक्त से पहले नहीं होगा शहरयार साहब जब यह बात कहते हैं तो इस पर सोचने का मन करता है। यह सच है या नहीं पर लोग ऐसा ही कहते हैं। वक्त से पहले कुछ भी नहीं मिलता। हर मुलाकात का, हर बात का, हर खयाल का वक्त...
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डा.सुभाष राय
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[03 May 2010 08:25 AM]



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