हिन्दी ब्लागिंग और टिप्पणियों का हिसाब-किताब (हास्य कथा)

कुछ ईधर की, कुछ उधर की (दरवाजे पर दस्तक की आवाज)ललित शर्मा:- अरी ओर भगवान! जरा देखना तो सही कौन नासपीटा इतनी सुबह सुबह दरवाजा खटकता रहा है।(इतनी देर में फिर से दरवाजे पर ठक ठक की आवाज सुनाई देने लगी)ललित:- (खीझ कर) तुम मत सुनना! मुझे ही उठना पडेगा। हाँ भाई बोलो तो सही कौन हो।... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

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[03 May 2010 08:30 AM]

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