बेलगाम वक़्त
सभी को पता है की वक़्त तो बस भागता ही है.. और किसी के रोके रुकता नहीं फिर भी एक कोशिश रहती है कई बार वक़्त पे विजय पाने की तो उसी कोशिश को अभिव्यक्त कर दिया है इस रचना मे.... कोशिश करता और फिर थकता हूँ,हर पल थामूं ये कोशिश करता हूँ,पर मेरी उम्मीदों से...
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हिमांशु पन्त
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[03 May 2010 08:07 AM]



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