तुम्हे मेरी दाढ़ी अच्छी लगती है ..
शरद बिल्लोरे की एक कविता शरद और मैं भोपाल के रीजनल कॉलेज में साथ साथ थे । कविता लिखने की शुरुआत के साथ साथ बहुत सारी बदमस्तियाँ हमने कीं । मैं सोच रहा था इस बार फिर उसकी किसी शरारत के बारे में लिखूंगा लेकिन मैं सिर्फ सोचता रहा और कुछ लिख नहीं पाया...
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शरद कोकास
sharad billore
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[03 May 2010 07:43 AM]



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