अपने अपने प्यार की परिभाषा

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** ना जाने किसकी तलाश मेंजन्मों से भटकती रही हूँ मैंअपनी रूह से तेरे दिल की धड़कन तकअपना नाम पढ़ती रही हूँ मैं....लिखा जब भी कोई गीत या ग़ज़लतू ही लफ़्ज़ों का लिबास पहने मेरी कलम से उतरा हैयूँ चुपके से ख़ामोशी से तेरे क़दमो की आहटहर गुजरते लम्हे में सुनती... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]

kavita prem .ehsaas

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[03 May 2010 07:19 AM]

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