'रंजिश का शामियाना..'
..."देहलीज़ से उठे नैन..ना जाने क्यूँ थे बेचैन..सफ़र की थकान थी..या..सपनों का आशियाना..साँसों की खलिश थी..या..रंजिश का शामियाना..क्या दरिया बाँध सकूँगा..कभी...क्या काज़ल मिटा सकूँगा..कभी..क्या माज़ी भुला सकूँगा..कभी..!"......
[पूरी पोस्ट]
Priyankaabhilaashi
9
0
0
0
6
[03 May 2010 06:08 AM]



Shuffle








