'रंजिश का शामियाना..'

प्रियंकाभिलाषी.. ..."देहलीज़ से उठे नैन..ना जाने क्यूँ थे बेचैन..सफ़र की थकान थी..या..सपनों का आशियाना..साँसों की खलिश थी..या..रंजिश का शामियाना..क्या दरिया बाँध सकूँगा..कभी...क्या काज़ल मिटा सकूँगा..कभी..क्या माज़ी भुला सकूँगा..कभी..!"...... [पूरी पोस्ट]
writer Priyankaabhilaashi
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[03 May 2010 06:08 AM]

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