दूर से अपना घर देखना चाहिये
वरिष्ठ कवि विनोद कुमार शुक्ल की यह विख्यात कविता मुझे अभी अभी सुन्दर ठाकुर ने फ़ोन पर सुनाई. मुझे लगा कि इसे यहां आप के साथ बांटा जाना चाहिये.दूर से अपना घर देखना चाहिएविनोद कुमार शुक्लदूर से अपना घर देखना चाहिएमजबूरी में न लौट सकने वाली दूरी से अपना...
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Ashok Pande
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[03 May 2010 05:23 AM]



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