पता नहीं क्या क्या कह जाते है लोग
पता नहीं क्या क्या कह जाते है लोगपता नहीं किस रौ में बह जाते है लोग कोई आंखन देखी ना कोई कानन सुनीज्यादा बहुत देखा देखी ही कहते है लोग मनचीती रबरबी,मनचाहा कहते है लोग एक कहे तोड़ो बुतों को,कोई मस्जिद को कहता कोई असल हमारा इल्म...
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Amit Sharma
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[03 May 2010 05:01 AM]



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